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नवंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वैश्विक नवाचार सूचकांक 2024 || Global Innovation Index 2024

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  वैश्विक नवाचार सूचकांक  2024  ||Global Innovation Index 2024 वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) 2024 भारत कि रैंक :- 39वीं  2015 में 81वीं रैंक से यह उन्नति महत्वपूर्ण है। देश मध्य और दक्षिणी एशिया में 10 अर्थव्यवस्थाओं में से शीर्ष स्थान और निम्न-मध्यम आय वर्ग के देशों में भी पहला स्थान बरकरार रखा है।  यह रैंकिंग भारत के लगातार नवाचार में सुधार और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।  इसके अलावा, भारत विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर रैंकिंग में वैश्विक स्तर पर 4वें स्थान पर है,जिसमें मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख शहर दुनिया के शीर्ष 100 विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर में सूचीबद्ध हैं।  भारत अमूर्त संपत्ति की गहनता में वैश्विक स्तर पर 7वें स्थान पर है और नवाचार आउटपुट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में 33वें स्थान पर।  इन सुधार में सरकारी पहलों जैसे:- स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, और अटल इनोवेशन मिशन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्होंने नवाचार, अनुसं...

कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए WHO सत्यापन प्राप्त करने वाला पहला देश बना "जॉर्डन" Jordan Becomes First Country To Receive WHO Verification For Leprosy Eradication

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  कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए WHO सत्यापन प्राप्त करने वाला पहला देश बना "जॉर्डन" Jordan Becomes First Country To Receive WHO Verification For Leprosy Eradication विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जॉर्डन के हाशमीट साम्राज्य दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने आधिकारिक तौर पर कुष्ठ रोग को खत्म करने की पुष्टि की व्याख्या की। यह वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों में एक नए युग का प्रतीक है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा,  " WHO जॉर्डन को इस प्रभावशाली उपलब्धि के लिए बधाई देता है ।"  "कुष्ठ रोग ने हजारों सालों से मानव को पीड़ित किया है, लेकिन देश-दर-देश हम संक्रमण की रोक रहे हैं और व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को इसके दुख और कलंक से मुक्त करने कि कोशिश कर रहे हैं।" कुष्ठ रोग एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) है जो अभी भी " 120 से अधिक देशों " में पाया जाता है। हर साल "2 लाख" से अधिक नए मामले सामने आते हैं। लेकिन जॉर्डन में दो दशकों से अधिक समय से कुष्ठ रोग का कोई भी एक स्वदेशी मामला सामने नहीं आया है, जो इस रोग को समाप्...

नेशनल कंप्यूटर सुरक्षा दिवस(National Computer Security Day)

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  नेशनल कंप्यूटर सुरक्षा दिवस(National Computer Security Day)  हर साल 30 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा के महत्व को उजागर करना और लोगों को उनकी ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना है। इसे पहली बार 1988 में मनाया गया, जब कंप्यूटर के उपयोग में वृद्धि के साथ साइबर खतरों मैं भी बढ़ोतरी आई।   नेशनल कंप्यूटर सुरक्षा दिवस का महत्व: 1.साइबर सुरक्षा जागरूकता:   यह दिन हमें कंप्यूटर सुरक्षा उपयोगिता, जैसे मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर, का उपयोग करने के महत्व की याद दिलावाता है।   2.डेटा सुरक्षा :   व्यक्तिगत और पेशेवर महत्वपूर्ण डेटा की सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक करता है।   3.साइबर खतरों से बचाव:   फिशिंग, मैलवेयर, और हैकिंग जैसे खतरों से बचने के लिए सचेत करता है। कैसे मनाएं यह दिवस? 1. अपने कंप्यूटर और डिवाइस को "एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर" से स्कैन करें।   2. अपने ऑनलाइन खातों के लिए "मजबूत और अद्वितीय सुरक्षात्मक पासवर्ड" बनाएं।   3. अनजान ईमेल और लिंक (spam)पर क्लिक करन...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 :- नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्र सीमाओं या नाम में परिवर्तन Article 3 Of The Indian Constitution:- Creation Of New States And Alteration Of The Territorial Limits Or Name Of Existing States.

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 :- नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्र सीमाओं या नाम में परिवर्तन Article 3 Of The Indian Constitution:- Creation Of New States And Alteration Of The Territorial Limits Or Name Of Existing States. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह भारत के राज्यों और संघीय क्षेत्रों के पुनर्गठन, सीमाओं में परिवर्तन, या नए राज्यों के गठन से संबंधित कानून बना सके। यह प्रावधान भारतीय संघ की क्षेत्रीय अखंडता और लचीलापन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।   अनुच्छेद 3 की मुख्य विशेषताएँ:  1. नए राज्यों का निर्माण: संसद किसी राज्य में से उसका राज्यक्षेत्र अलग करके अथवा दो या अधिक राज्यों को या राज्यों के भागों के साथ मिलाकर अथवा किसी राज्यक्षेत्र को किसी राज्य कें भाग के साथ मिलाकर नए राज्यों का निर्माण सकती है।   2. राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन: राज्यों की सीमाओं को घटाने या बढ़ाने का प्रावधान है  3. राज्यों के नाम में परिवर्तन: किसी राज्य का नाम बदला जा सकता है।  4. संसद का अधिकार: यह प्रक्रिया संस...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2. Article 2 Of The Indian Constitution.

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    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2. Article 2 Of The Indian Constitution. अनुच्छेद 2 भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2 संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह किसी नए राज्य को भारत के संघ में सम्मिलित कर सके या किसी भी राज्य को गठित कर सके।  यह अनुच्छेद भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संसद को नए राज्यों को स्वीकार करने या आंतरिक रूप से पुनर्गठन करने का संवैधानिक आधार देता है।   इस अनुच्छेद के तहत, संसद को यह शक्ति है कि वह कानून बनाकर किसी भी विदेशी क्षेत्र को भारत में सम्मिलित कर सके। यह प्रक्रिया संविधान के संघीय ढांचे को स्थायित्व प्रदान करती है और देश के भू-राजनीतिक संरचना को स्थिर रखने में सहायक है।   विशेष रूप से, अनुच्छेद 2 का उपयोग उन स्थितियों में किया जाता है जब किसी क्षेत्र को भारत में शामिल करने का निर्णय लिया जाता है। यह प्रावधान भारत के विस्तार और राजनीतिक समायोजन के लिए एक मार्ग प्रशस्त करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 की विशेषताएं  यह अनुच्छेद भारत की भौगोलिक और राजनीतिक संरचना में महत्वपूर्...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1. Article 1. of The Indian Constitution

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  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1. Article 1. of The Indian Constitution भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में परिभाषित करता है और देश के क्षेत्रीय ढांचे को स्पष्ट करता है।  राज्य पुनर्गठन और अनुच्छेद 1 संविधान में राज्यों की सीमाओं और नामों को बदलने का प्रावधान है (अनुच्छेद 3 के तहत)।   1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम और उसके बाद नए राज्यों का गठन (जैसे, छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना) अनुच्छेद 1 की व्यावहारिकता को दर्शाते हैं।   इस अनुच्छेद में तीन मुख्य प्रावधान हैं 1.भारत का नाम :-  अनुच्छेद 1(1) के अनुसार, "भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।"   भारत को "इंडिया" और "भारत" दोनों नामों से मान्यता दी गई है।  "इंडिया" नाम ब्रिटिश शासन और अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में प्रचलित हुआ।  "भारत" नाम प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान से जुड़ा है। 2023-24 में "इंडिया" को बदलकर केवल "भारत" करने की मांगें भी चर्चा में रही हैं।   2. राज्य और क्षेत्र :-  भारत को एक "राज्यों का संघ" (Union of...

न्यायालय किन धाराओं के तहत मृत्युदंड दे सकता है ? Under Which Sections Can The Court Give Death Penalty ?

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  न्यायालय किन धाराओं के तहत मृत्युदंड दे सकता है ? Under Which Sections Can The Court Give Death Penalty ? न्यायालय विभिन्न धाराओं के तहत फांसी की सजा दे सकता है, जिनमें मुख्यतः शामिल हैं: 1.भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 :- यह हत्या के लिए है। आईपीसी 302 भारतीय दंड संहिता की धारा को संदर्भित करता है जो हत्या से संबंधित है। यह अपराध को परिभाषित करता है और हत्या करने के लिए सजा निर्धारित करता है, जिसमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड शामिल हो सकता है। यह धारा उन परिस्थितियों को निर्दिष्ट करती है जिनके तहत किसी व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाया जा सकता है, जिसमें इरादे और कृत्य की प्रकृति पर जोर दिया जाता है। 2.IPC की धारा 121:- देशद्रोह या युद्ध के खिलाफ साजिश करने के लिए। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 121 भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने के अपराध से संबंधित है। यह अधिनियम को हिंसक तरीकों से सरकार को उखाड़ फेंकने या भारत के खिलाफ संघर्ष में दुश्मन की सहायता करने के प्रयास के रूप में परिभाषित करता है। इस अपराध की सज़ा गंभीर हो सकती है, जिसमें मामले ...

सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी की नई मूर्ति लगाई (लेडी ऑफ जस्टिस) New Statue Of Goddess Of Justice Installed In Supreme Court 'Lady Of Justice'‌

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   सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी की नई मूर्ति लगाई (लेडी ऑफ जस्टिस) New Statue Of Goddess Of Justice Installed In Supreme Court 'Lady Of Justice'‌ इस मूर्ति की आंखों से पट्टी हटा दी गई है।‌ ये सब निर्णय CJI डी वाई चंद्रचूड़ जी का है CJI डी वाई चंद्रचूड़ के निर्देशों पर न्याय की देवी में बदलाव कर दिया गया है। CJI डी वाई चंद्रचूड़ का मानना है कि तलवार हिंसा का प्रतीक है, जबकि, अदालतें हिंसा नहीं, बल्कि संवैधानिक कानूनों के तहत इंसाफ करती हैं। बाया हाथ में तलवार के स्थान पर संविधान की किताब रखी गयी है‌  दाया हाथ में तराजू सही है कि जो समान रूप से सबको न्याय देती है। मुर्ति सफेद रंग की है और इसे सफेद रंग के स्क्वायर पर रखा गया है CJI सर दिवाई चंद्रचूड़ ने इन बदलावों के उद्देश्य से बताया कि कानून में कोई अराजकता नहीं है। पुरानी मूर्ति में दिखाया गया अंधा कानून और सजा का प्रतीक आज के समय के हिसाब से सही नहीं था, इसलिए ये बदलाव किए गए हैं।

कॉलेजियम प्रणाली क्या है ? What Is Collegium System ?

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  कॉलेजियम प्रणाली क्या है ? What Is Collegium System ? कॉलेजियम प्रणाली भारत में न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया है। यह प्रणाली मुख्यतः सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के चयन के लिए कार्यरत है। भारतीय संविधान के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश 124 के अंतर्गत आते हैं। कॉलेजियम प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं 1. संरचना: - कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं। 2. नियुक्ति प्रक्रिया :- कॉलेजियम न्यायाधीशों के लिए सिफारिशें करता है, जिन्हें बाद में राष्ट्रपति {अनुच्छेद 124 (2)}द्वारा अनुमोदित किया जाता है। राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से पहले प्रधानमंत्री और कानून मंत्री से सलाह लेते हैं। कभी-कभी, सरकार उच्चतम न्यायालय की सिफारिशों का भी ध्यान रखती है। 3. पदोन्नति : -यह प्रणाली वरिष्ठता के आधार पर न्यायाधीशों की पदोन्नति के लिए भी जिम्मेदार है। सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है।  4. स्वायत्तता: -कॉलेजियम प्रणाली का उद्देश...

हिंदू विधि के अनुसार संरक्षक किसे कहते हैं? Who Is Called A Guardian According To Hindu Law?

  हिंदू विधि के अनुसार संरक्षक किसे कहते हैं? Who Is Called A Guardian According To Hindu Law? हिंदू विधि के अनुसार, संरक्षक :- संरक्षक वह व्यक्ति है जो किसी की देखभाल, संरक्षण और मार्गदर्शन करता है। यह आमतौर पर परिवार के सदस्यों, जैसे कि पिता या दादा, या किसी अन्य (या "गुरु" या "पालक") प्रतिष्ठित व्यक्ति को संदर्भित कर सकता है जो परिवार या समुदाय के लिए जिम्मेदार होता है।  विधि के अनुसार, संरक्षक का मुख्य कर्तव्य :- यह सुनिश्चित करना होता है कि संरक्षित व्यक्ति का भरण-पोषण और सुरक्षा सुनिश्चित हो, साथ ही उन्हें उचित शिक्षा और मार्गदर्शन भी प्रदान करना होता है।

संविदा और क़रार में क्या अंतर हैं ? What Is The Difference Between Contract And Agreement?

  संविदा और क़रार में क्या अंतर हैं ? What Is The Difference Between Contract And Agreement? संविदा :- वह करार है जो विधित: प्रवर्तनीय हो,संविदा हैं संविदा एक कानूनी समझौता है जिसमें दो या दो से अधिक पक्षकार किसी विशेष कार्य को करने या न करने पर सहमति की मांग करते हैं या सहमति व्यक्त करते हैं यह एक निश्चित रूप से बंधा हुआ वचन है जिसमें गुजारा भत्ता , अधिकार और दायित्व निर्धारित होते हैं यह परिभाषा संविदा अधिनियम 1872 की धारा 2(h) के दी गई है क़रार :- क़रार एक ऐसा वचन है जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल हो, वचन शब्द की परिभाषा धारा 2(b) में दी गई है जब प्रस्तावना स्वीकार कर ली जाती है तो वह वचन बन जाता है जिस कानून के रूप में लागू किया जा सकता है वचन से ही क़रार बनता है और क़रार से ही संविदा बनती है , हर कोई संविदा क़रार हो सकती है लेकिन हर कोई क़रार संविदा नहीं हो सकता ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की उम्र निर्धारित करने का दस्तावेज नहीं है- आधार ( Supreme Court Said That There Is No Document To Determine Age – Aadhaar )

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा की उम्र निर्धारित करने का दस्तावेज नहीं है- आधार ( Supreme Court Said That There Is No Document To Determine Age – Aadhaar )   पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए   सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भैया और जस्टिस संजय करोल की पीट ने यह कहाॅ की उम्र निर्धारित करने का दस्तावेज आधार कार्ड को नहीं मान सकते  किशोर अधिनियम 2015 की धारा 94 के तहत उम्र निर्धारित करने का दस्तावेज 10वीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर किया जाएगा ना कि आधार कार्ड से क्योंकि आधार कार्ड एक पहचान का दस्तावेज बन सकता है ना की उम्र निर्धारित करने का  पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट की एक पीट ने सड़क दुर्घटना में मृतक पीड़ित की आयु का निर्धारण आधार कार्ड से कर दिया जो कि सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय को गलत ठहराया

निजता को मौलिक अधिकार बनाने की लड़ाई लड़ने वाले जस्टिस ? Justice Who Fought To Make Privacy A Fundamental Right? Indianlaweducatio

  निजता को मौलिक अधिकार बनाने की लड़ाई लड़ने वाले जस्टिस ? Justice Who Fought To Make Privacy A Fundamental Right? जस्टिस पट्टास्वामी :- कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व जज और आधार की वैधता को चुनौती देने वाले मुख्य याचिका करता थे उनकी इस याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना था आधार कार्ड योजना जिसके अधीन भारत सरकार विभिन्न परियोजनों के लिए देश के निवासियों के जनसंख्यिक ( डेमोग्राफिक) तथा जीवमितीय ( बायोमेट्रिक) दोनों की आंकड़े एकत्र और संकलित कर रही थी विभिन्न आधारों पर जिसमें एकांतता के अधिकार का उल्लंघन भी था जस्टिस पट्टास्वामी का जन्म 8-2-1926 को हुआ निधन 28 -10-2024 को हुआ 1952 में वकालत शुरू की और 1977 में कर्नाटक हाई कोर्ट के जज बने और 1986 में रिटायर हुई रिटायरमेंट के बाद भी वह सक्रिय रहे कानून के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती संख्या से वे खुश थे उन्होंने कहा था कि जब मैंने कानून की पढ़ाई की तब मेरी क्क्षा में एक भी महिला नहीं थी आज लाॅ क्लास में महिलाएं शीर्ष पद पर है आज कानून स्नातकों में लगभग 40% महिलाएं हैं 2012 में आधार को...